Thursday, August 15, 2019

Indian Independence Day :

Indian Independence Day : भारतीय स्वतंत्रता दिवस 

साथिओ आज हमने अपनी आज़ादी के 73 वे साल का जश्न मनाया देश, विदेश जहां पर भारतीय रचे बसे हैं सब ने अपना आज़ादी का दिवस त्यौहार के रूप में मनाया। 


हमें  गर्व है अपनी आज़ादी पर और गर्व है उन शहीद और आज़ादी के लड़ाकों पर जिनकी बदौलत हमें ये दिन देखना नसीब हुआ। 

हम आज  जोखुली हवा में साँस ले रहे है वो बहुत ही मुश्किल से हासिल हुयी है पर कुछ तथा कथित लोग इसको ऐसा नहीं मानते है , उनको  लगता है की ये आज़ादी बहुत ही सस्ती चीज है और कोई भी हासिल कर सकता है वो इसको राष्ट्रीय पर्व के रूप में नहीं मानते है कुछ धर्म विशेष के लोग इसको काला दिन के रूप में मानाने को तैयार बैठे है। 

जहां आज देश और विदेश में भारत का डंका बज रहा है और दुनियाँ भारत को सलाम ठोक रही है कुछ हराम के पिल्लै आज के दिन को काला दिन मानाने की बात कह रहे है और एक इंदिरेक्ट रूप से भारत के खिलाफ लड़ने की बात कर रहे है। 

असली आज़ादी 

दोस्तों जो आज़ादी हमको विरासत में मिली है शायद हमको इसके मायने भी नहीं पता है और हम कभी न कभी फ्रीडम फाइटर को किसी न किसी बहाने कोस  लेते हैं पर शायद हमको इस बात का कतई अंदाज़ा नहीं है की वो लोग कैसे रहे होंगे जिन्होंने अपने जीवन को अपने इस महान देश भारत पर कुर्बान  कर दिया। 

हम भूल जाते है की ये आज़ादी बहुत आहुतियां देने के बाद मिली है, मज़ाक  उड़ाते है अपने देश का, बेकार कहते हैं , रहने लायक नहीं है, ये मुल्क गरीब है , आदि आदि बातें सुनने देखने को मिल जाती है कुछ मौके और वतन परस्त लोगो ने इसको ऐसा बैसा कहा है।  ऐसा हरगिज़ नहीं है की मेरा देश जो ऊपर लिखा है उसमे से सही या गलत है हो सकता है ऐसे लोगो ने देश के किसी कौने में जाकर कुछ छोटा बड़ा देख लिया हो पर इसका मतलव बिलकुल नहीं है की मेरा देश रहने लायक नहीं है, गरीब है, बेकार है। ये उन लोगो की मानसिक बीमारी का संकेत है जो अपने आप कुछ अच्छा न कर पाने की स्थिति में अनाप सनाप बाके जा रहे है.

उनको आज़ादी चाहिए कुछ भी करने की , किसी को कुछ भी कहने की, कुछ भी अनाप सनाप लिखने बोलने की , किसी पर भी कीचड उछलने की, पर ऐसा तो मुमकिन नहीं है की आपको कुछ भी बोलने दिया जाए आपके मानवीय अधिकारों की ओट में। शुक्र कीजिये की आप भारत में  रहते है आप यदि कुछ ऐसे देश में होते जहा पर हर चीज की पावंदी है और कुछ भी बिना अनुमति के बोलने की इज़ाज़त नहीं है कल्पना कीजिये तब आप क्या करते।  ऐसे लोगो ने आज़ादी और मानव अधिकारों के नाम पर बक्शा नहीं जाना चाहिए। 

यही तो असली आज़ादी है सब के लिए जो आप करना चाहते है कर सकते है जहा जाना चाहते हैं जा सकते है , कुछ भी कर सकते है और क्या चाहिए आपको अगर नहीं पसंद है ये देश तो आप शौक से जा सकते हैं वह जहा पर आपकी जरुरत  भी नहीं है। भारत दुनियाँ का ऐसा मुल्क है जहा पर हर धर्म , संप्रदाय , जाती , भासा के लोग बिना किसी भेदभाव के रहते है, और ये हमको हमारा हक़ हमारा सविधान देता है जिसकी बदौलत सब यहाँ पर सही खुसी रहते है। 

नहीं है अभी भी पूरी आज़ादी 

ये वाक्य में इस लिए बोल रहा  हूँ की आज़ादी के कितने ही साल बिताने के बाद भी हम अपने समाज में जो कुरीतियां फैली है उनको समूल रूप से नहीं मिटा पाए जिसका हमको रंज है। देश के कुछ हिस्से जहा पर शिक्षा का प्रसार नहीं है वह पर धार्मिक पाखंडो ने हमारे समाज को जकड रखा है  दहेज़ प्रथा, घूंघट प्रथा , नारी घर की चार दीवारी में ही रहेगी, लड़की पैदा होने पर ही मार देना, बाल मज़दूरी , बाल विवाह , दूसरा विवाह नहीं" ऐसे कई ज्वलनशील मुद्दे हैं जिनको आगे लाना बहुत ही जरुरी है।  यदि हमको समाज में फैली इन कुरीतिओं को मिटाना है तो समाज को शिक्षित करना होगा।  महिलाओं को समाज को हिस्सा बनाना होगा, उनको उनके अधिकार देने होंगे, पढ़ना लिखना होगा।  नारी को वो सम्मान देना होगा जिसकी  हक़दार है, वो सिर्फ बच्चो को सँभालने या घर ही काम करने के लिए नहीं है वो सब कुछ कर सकती है वो पुरुष  प्रधान समाज कर रहा है। अभी भी हमारे पढ़े लिखे समाज में लड़कियों के जीन्स, टॉप, पैंट पहनने , मोबाइल का प्रयोग नहीं करने के असभ्य बर्ताव किये जाने के यदा कदा वाकये देखने को मिल जाते है , क्या वाकई में हमने इस समाज की कल्पना की थी ?

महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में कुछ नहीं बताया जाता उनका हर तरफ से शोषण होता है, शादी में दहेज़ काम या न लाने पर मारपीट करना , घर से बहार कर देना , मायके भेज देना , यहाँ तक की उसकी हत्या भी करना जायज माना  गया है। घूंघट करना एक रस्म है जो माननी ही पड़ेगी , नारी को सिर्फ और सिर्फ घर का काम करना पड़ेगा बहार नहीं जा सकती है , यदि लड़की पैदा हो गयी तो समझ लो की पता नहीं क्या हो गया और उसको बड़ा गलत व्यव्हार का सामना करना पड़ेगा , यहाँ तक की उसका पति शायद दूसरे विवाह की सोच ले, यदि किसी महिला का पति किसी कारन वश मर जाता है तब उस नारी का क्या हाल होता है कल्पना करना ही बहुत बड़ी बात है उसको डायन , पति को खा गयी , पिशाचनी  कहते हैं , बाल का मुंडन कर दिया जाट है।  ये वो गुलामी की जंजीरें है जो हम खुद ही अपने पैरों में डाले हुए है। इनको तोड़ना बहुत जरुरी है। 


आज भी हमारे  पढ़े लिखे समाज में महिलाओं की स्तिथि बदतर है उनको वो नहीं करने दिया जाता जो वो कर सकती है , उनको समाज , धर्म , परिवार की रूढ़िवादी परंपराओं की दुहाई देकर उनके अधिकारों का शोषण किया जाता है पर उनकी सिसकियाँ घर की चार दीवारी में ही घुट के रह जाती है। कई कई बार तो सामाजिक संस्थाओं ने महिलाओं को मौत के मुँह से निकला है।  लड़की पैदा होने पर तरह तरह के  ताने देकर उसका परिवार में ही शोषड़ होता है। बिना महिलाओं की समाज व् परिवार में भागीदारी के हम उन्नति  नहीं कर सकते हैं। 

गुलामी के कारक 

हम भले ही अंग्रेजों की दासता से आज़ाद हुए हो पर वास्तविक गुलामी हमने आज तक ओढ़ राखी है वो हमारे अपने ही बनाये हुए धागो की चादर है , जिनसे हम आज़ाद होना चाहते है पर हो नहीं प् रहे हैं , चाहे हम यू कहे की हम होना नहीं चाहते या फिर यूं कहिये की हममें इच्छा शक्ति की कमी है पर होना हर  चाहता है , पर शुरुआत कौन करे। 

यदि हम बात करें हमे अन्न देने वाले किसान की तो हालत अभी भी ठीक नहीं है , हां लेकिन कुछ सालों में बहुत सुधार हुआ है , पर ये काफी नहीं है, जिन चीजों की किसान को जरुरत होती है वो नहीं समय से नहीं मिलता है लिहाज़ा काफी नुक्सान होता है , बिजली सप्लाई , खाद , उर्वरक , बीज, कीटनाशक , पानी जैसी गंभीर समस्याएं हैं।  यदि ये सब मिल गया तो कोई नहीं कह सकता ही मौसम क्या गजब ढहायेगा , फसल ख़राब होती है जिसके कारन बैंक का कर्ज समय से नहीं दे पता लिहाज़ा कर्ज बढ़ने पर आत्महत्या जैसे कदम उठाने पड़ते है। कर्ज में डूबा किसान क्या कर सकते है।  देश प्रदेश की सरकारों को चाहिए की वो किसानो को आने वाली हर समस्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाये। 


मूलभूत कारक है जो हमको आज भी गुलामी की जंज़ीरों में जकड़े हुए है। 

अशिक्षा 
गरीबी 
भुखमरी 
धार्मिक पाखंड 
जातिवाद 
धार्मिक रूढ़िवादी विचार 
भ्रस्टाचार 
क्षेत्रवाद 
भाई-भतीजावाद 
परिवारवाद 


लिखने को तो बहुत है अगर लिखे बैठ जाऊंगा तब शायद में बूढ़ा हो चूका होऊँगा। पर शायद मुझे लगता है की अगर हमने इन चीजों पर काबू पा लिया तो हम कह सकेंगे की हम सौ फ़ीसदी स्वंत्रत हो चुके है और उस दिन हमको अपने आप पर गर्व होगा। 

जय हिन्द 
जय जवान , जय किसान 

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