Thursday, July 25, 2019

मेरा ग्वालियर, स्वच्छ ग्वालियर,

गन्दगी के ढेर पर ग्वालियर शहर 
मेरा ग्वालियर, स्वच्छ ग्वालियर, कितना अच्छा और सुन्दर  लगता है जब हम ये कहते सुनते किसी को देखते हैं , पर हक़ीक़त में सब कुछ उल्टा है पैसा पानी की तरह बहकर हम अपने ग्वालियर शहर को गंदगी मुक्त नहीं कर पाए और देखने वाली बात तो यह है की हम देखने के बाद भी इन सब बातों को नज़र अंदाज़ कर रहे है। स्वछता की बातें तो बस किताबों , अखबारों, न्यूज़, मैगज़ीन, इंटरनेट पर हम सब करते है पर वो नहीं करते है जो हमको करना चाहिए बस हम एक दूसरे को दोष देने में बहुत आगे है और यही नहीं हमारे जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी, नेतागण सब एक दूसरे पर टालते हुए नज़र आते हैं। आज शहर में कचरे और गंदगी के ढेर हर तरफ लगे हुए हैं जिनको उठाने की जहमत जिम्मेदार भी नहीं कर रहे है। 

कौन है गंदगी का जिम्मेदार ?

हम सब एक दूसरे पर गंदगी करने, फ़ैलाने का दोष लगते हैं, निगम अधिकारी कर्मचारी अपना  काम सही ढंग से  नहीं करते हैं आधा अधूरा काम करते हुए अपने कर्तव्य से इतिश्री कर  लेते हैं। नेता , सेलेब्रटी , अधिकारी भी फोटो खिचवाने तक ही स्वस्छता अभियान को आगे बढ़ने की बात कहते हैं पर उसके बाद धरातल पर सफाई  नज़र नहीं आती है। 

हम इस गंदगी को फ़ैलाने के लिए  जिम्मेदार हैं और कोई नहीं , हम हमेशा  घर का कचरा बहार सड़क पर, दूसरे के दरवाजे पर फेंकते हैं , डस्टबिन में नहीं डालते हैं, क्यू डालें ? क्या डस्टबिन में कचरा डालने से सफाई हो जाएगी, कोई मैडल मिलेगा, शाबाशी मिलेगी , लोग क्या कहेंगे डरपोक या फलां फलां बातें।  अगर हम सड़क पर कचरा फेंकते हैं तब हमको आत्मसम्मान महसूस होगा , शायद शाबाशी मिल जाये और  सड़क पर कचरा फैकने का मैडल ही मिल जाये और दबंगई की मिशाल कायम हो जाये अगर हम दूसरे से दरवाजे पर कचरा फेंक दे, वह क्या बात है मेरे प्यारे नगर वासिओ तुम को मेरा लाख लाख प्रणाम।  तुम जैसे लोग ही शहर की सुंदरता पर दाग और कलंक लगते हो। 

एक महत्वपर्ण बात इसमें हमारी माताओ बहिनो का बड़ा योगदान रहता है, वो ये  देखती हैं  की कोई देख तो नहीं रहा , अगर नहीं तो सारा कचरा कुछ ही देर में सड़क पर पड़ा दीखता है। ऐसे लोगो को  कोई मतलब नहीं है की आप सड़क पर चलें या कचरे पर सड़क पर कचरा है या कचरे  में सड़क, कोई खास फ़र्क़ नहीं पड़ता है। हम कभी नहीं सुधर सकते हैं। भारत के प्रधान मंत्री तक सफाई करने झाड़ू लगते नज़र आते हैं  पर हम नहीं सुधर सकेंगे क्यूंकि आदत तो वही गंदगी में रहते की पड़ी है। 

निगम जिम्मेदार भी है गंदगी को फ़ैलाने में, जब भी कभी देखता हूँ की निगम की गाड़ी में कचरा भरा जा राजा है तब वो लोग बहुत सा कचरा ऐसे ही छोड़ देते हैं या फिर इधर उधर फैला देते हैं और जिस गाड़ी में कचरा लेजाया जा रहा होता है वो भी खुली हुयी होकर उसका भी कचरा सड़क पर फैलता है जो सफाई की हुयी जगह में गंदगी होती है।  
निगम के कर्मचारी भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर कचरा फेंक देते हैं।  जहा डंप यार्ड है वह पर न ले जाते हुए दूसरी जगह जला देते हैं या खली गद्दे में फेंक देते है जिससे बीमारियों के पैदा होने का गंभीर खतरा हमेशा बना  रहता है। 
हद तो तब हो जाती है जब सफाई के लिए ही एक कंपनी तो ठेका दे दिया गया है बाबजूद इसके की वो कंपनी भी अपना काम नहीं कर रही है, दिन प्रतिदिन कचरे के निपटान के लिए कोई खास कदम नहीं उठाये गए है।  कंपनी द्वारा सफारी कर्मचारिओं को मूल भूत सुविधा, समय पर वेतन न मिलना भी एक बहुत बड़ी समस्या है। 

शहर व अंचल के बड़े नामी गिरामी सरकारी अस्पताल का सफाई के मामले में बहुत बेकार हाल है, अभी कुछ दिन पहले सफाई कंपनी के कर्मचारिओं की मांगे कंपनी द्वारा पूरी न करने पर सफाई कर्मचारीओ द्वारा हड़ताल कर दी गयी थी जिसका सीधा सीधा ख़ामीजियाना मरीजों व् उनके अटेंडरों द्वारा भुगता गया जब मामले को मीडिया में लाया गया तब कुछ उठा पटक हुयी और निगम की सफाई टीम ने अस्पताल से एक दिन में 24 टन कचरा निकला जो बहुत ही ज्यादा है। 

हर रोज सड़कें साफ़ होती है पर कुछ देर बार वैसा का वैसा कचरा देखा जा सकता है क्यूंकि हम लापरवाह होते है इस बारे में कोई पहाल नहीं करना चाहता है , बस लापरवाही ही हमारा लक्ष्य है और हम हर प्रकार से इसको पूरा करना  चाहते हैं। 

बहाने बनाते निगम अफसर 

जब बात साफ सफाई पर  होती है तब निगम अफसर कई बहाने बनाकर जबाबदेही से बचते नज़र आते है , बजट नहीं है, कर्मियो की कमी , वाहनों की कमी, जरुरी संसाधनों की कमी  आदि बहाने बनाते है , जबकि सफाई जैसे महत्वपूर्ण कामो में इतना पैसा नहीं लगता है जितना बताया जाता है।  बजट में जनता का पैसा होता है और वो भी जनता के काम नहीं आता है और अफसर नेता मंत्री संत्री सब ऐसे के खा जाते है और जनता को सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता है। 

बारिश में होते सबसे खराब हालत 


अगर शहर में बारिश हो रही है तो गंदगी का आलम मत पूछो आपको हर जगह गंदगी देखने को मिल जाएगी।  कोई कचरा उठाने नहीं आता , आता भी है तो वो खाना पूर्ति करके चला जाता है।  दिनों तक कचरा नहीं उठ पता है।  सड़क पर यु ही कचरा फैलता रहता है जिससे बीमारियां फैलती  रहती है। यही कचरा नालियों में फस जाता है जिससे नालियां चौक हो जाती है और पानी रुक जाता है गटर बंद हो जाते हैं जिसके लिए हम भी बहुत हद तक जिम्मेदार है। 




हम हर कदम पर ये सोच लें की हमको गंदगी नहीं करनी है तो गंदगी का नमो निशान तक नहीं होने वाला मगर हम नहीं करना  चाहते है दुसरो पर दोष देना हमारी आदत बन चुकी है हम कुछ भी कर लो नहीं सुधर सकते हैं। मगर हमको सुधरना होगा नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब हम अपने घर ऑफिस को ही कचरे या डंपिंग यार्ड बना लेंगे। अधिकारिओ को जगाना होगा जो गहरी नींद में  सोये हुए है फटकार लगनी होगी , सवाल करने होंगे उनसे जुंको आपने चुना है याद दिलाना होगा की उन्होंए क्या  वादे किये था आपसे वोट मांगते टाइम। लोगो को जागरूक करना होगा सुधर करना होगा।


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