Friday, March 29, 2019
हमारे समाज के प्रति कर्तव्य-||
हमारे समाज के प्रति कर्तव्य-||
महिलाओं के अधिकार
प्रायः देखने में आता है कि, समाज में महिलाओं के अधिकारों का हनन किया जाता है और उनके अधिकारों को कोई खास महत्व नहीं दिया जाता है उनके अधिकारों को हमारे समाज में कुचला एवं दबाया जाता है। उनकी बात नहीं सुनी जाती है। हमें चाहिये कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिये विशेष प्रकार के कानून बनाये जाकर उनके हकों को उतना ही तवज्जो दिया जाना चाहिये जितना हम अपने लिये दिये देते हैं।
समानता का अधिकार
समाज में हर व्यक्ति को एक समान रहने का अधिकार है और यह अधिकार हमें हमारा संविधान देता है। किसी को भी किसी व्यक्ति के द्वारा उंचा अथवा नीचना कहने, बताने अथवा उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं हैं, यह एक आपराधिक कृत्य है जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं हैं। हम सब एक हैं। ईश्वर की संतान हैं। सभी के खून का रंग लाल ही होता है, त्वचा का रंग भिन्न हो सकता है परन्तु मानव एक समान हैं। समाज में इंसानों में भेदभाव करने वालों को सख्ती से दण्ड देना चाहिये ताकि आने वाली नस्ले इससे सीख लें।
बालकों के हितों की रक्षा
हमारे समाज में बालक भगवान का रूप कहे जाते हैं तथा उनको समय≤ पर हम अपने स्तर पर शिक्षित कर समाज में आगे लाने हेतु तैयार करते हैं। बालकों की शिक्षा दीक्षा समय पर किये जाने हेतु हम हर संभव प्रयास करते हैं। परन्तु हमारे ही समाज में छोटे बच्चों की शिक्षा को ध्यान में न रखकर उनसे बालश्रम कराते हैं जो कि कानूनी रूप से एक अपराध है जिसके लिये दण्ड दिया जाता है। बाजारों में दुकानों पर नाबागलिकों से काम कराया जाता है तथा उनकी मेहनत के बाद एक छोटा से मूल्य दिया जाता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने समाज में एक घृणति काम न होने दें। कभी कभार यह भी देखने सुनने में आता है कि, बालक बालिकाओं के साथ लैंगिक अपराध भी होते हैं जिसको बदमानी एवं भय के कारण से समाज एवं कानून की नजरों में नहीं आ पाते हैं जिससे हमारी और भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि हम खुलकर ऐसे कृत्यों का विरोध करें व समाज में ऐसे प्रकरणों को सामने लायें और अपराधी को कठोर से कठोर दण्ड दिलवायें।
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