Friday, March 29, 2019
हमारे समाज के प्रति कर्तव्य-|
हमारे समाज के प्रति कर्तव्य-|
हमारे आदर्श एवं संस्कार ही हमारे समाज का आईना होते हैं। एक बेहतर समाज की स्थापना हेतु व्यक्ति को उसके परिवार से मिलने वाले संस्कार एवं उसके आदर्श ही होते हैं जो एक सभ्य एवं सुन्दर समाज की स्थापना करते हैं। दो या दो से अधिक व्यक्तियों को मिलाकर एक परिवार बनता है, परिवारों को मिलाकर एक गांव/कस्बा/शहर बनाया जाकर एक समाज की स्थापना होती है। कई गांव एवं शहरों को मिलाकर एक राज्य की स्थापना होती है। अनेक राज्य मिलकर ही एक राष्ट्र बनता है तथा कई देश मिलकर इस दुनियां का निर्माण करते हैं। यह दुनिया जहां पर मानव जीवन पाया जाता है उसे ही पृथ्वी कहते हैं। ब्रहमाण्ड में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहां पर मानव जाति एवं सभ्यता पाई जाती है। हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहां पर मानव एवं मानव जाति का उत्थान हो तथा एक सभ्य समाज की स्थापना की जाकर हमारे सामाजिक कर्तव्य एक दूसरे के प्रति और भी बढ़ जाते हैं।
एक सभ्य एवं सन्दर समाज की परिकल्पना ही हमारे आदर्श एवं संस्कार के बिना अपूर्ण हैं। मेरा मानना है कि, पृथ्वी पर मानवजाति में ऐसा शायद कोई ही इन्सान हो जिसे आदर्श एवं सुन्दर तथा सभ्य समाज में रहना पसन्द न हो। प्रत्येक व्यक्ति के विचार भिन्न हो सकते हैं परन्तु कभी न कभी कहीं न कहीं वह अन्ततः एक हो जाते हैं। समाज में हर स्तर पर भाईचारा एवं सहयोग की भावना होना अतिआवश्यक है।
समाज में शिक्षा का महत्व
समाज को शिक्षित करना सबसे महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदारी भरा कार्य है जिसको करना हर व्यक्ति के लिये संभव नहीं होता है। बिना शिक्षा के आदमी एक पत्थर की मूर्ति के समान है एक पशु के समान है जिसको अपने अन्दर के इंसान को पहचानने की भी क्षमता नहीं होती है। ढंग से बोलना, बातचीत करना, कार्य करना, समाज में अपनी पहचान बनाना, व्यवसाय करना, नौकरी करना आदि सब शिक्षा से ही प्राप्त होता है। अतएव् हमकों अपने समाज को देश के पटल पर आगे लाने हेतु शिक्षित करना आवश्यक है। समाज में कोई भी अशिक्षित नहीं रहना चाहिये।
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