Sunday, June 2, 2019
भारत में बढ़ती हुयी बेरोजगारी का कौन जिम्मेदार?
आज हमारे ही देश में हम लोग या यु कहें की देश का ३० प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। उनके पास कोई काम धंदा नहीं हैं , खेती बड़ी करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन कर हमारे सामने आयी है। बेतहाशा मेह्गाई की मार झेलता किसान क्या करे , क्या न करे अपने लिए आनाज उगाये या फिर देश के लिए या फिर परिवार को चलने के लिखे अथवा बैंक से लिए क़र्ज़ को चुकाने के लिए मेहनत करे।
देश में वैसे ही शिक्षा की स्तथी ठीक नहीं हैं, सरकार के नुमाइंदे कुछ करे या न करे उनको तो बस अपना टाइम काटना हैं यहाँ नहीं तो वह सही कही भी चलेगा पर इसके लिए कुछ करे तो वो उनसे होता नहीं है। बाकि बचा हुआ फण्ड या शिक्षा वो तो हमारे देश के नेता लोग ही खा जाते हैं।
बेरोजगारी का आलम ये है की युवा जिसने बहुत उच्च शिक्षा पायी हैं वो चपरासी की नौकरी के लिए फार्म भरता या इंटरव्यू देता नजर आता है , बहुत दुःख होता है की हमारे पास उनके लिए कुछ अच्छा का काम या नौकरी नहीं है। एक सरकारी नौकर के लिए करोड़ो आवेदन आते हैं और नौकरी दूर की कौड़ी हो चुकी हैं, सब सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं पर इसके लिए काम कोई नहीं करना चाहता है। में हु या दूसरा कोई भी सब अपने अपने काम या निजी स्वार्थ में वहुत ही व्यस्त हैं भले ही हमारे पास कोई काम नहीं है. ये हमारा आज का भारत है।
भारत में बढ़ती हुयी बेरोजगारी का कौन जिम्मेदार हैं हम आप या सरकार , में जहा तक समझता हु की हम तीनो ही जिम्मेदार हैं। हम और आप और सरकार सिर्फ और सिर्फ आज की सोचती है कल का कोई नहीं सोचता हैं जिसका कारन है की दिन व दिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। हम सिर्फ और सिर्फ पैसा कामना चाहते हैं जिसके लिए कुछ भी कर सकते हैं पर हम अपना भविष्य उज्जवल नहीं कर सकते हैं।
हम काम नहीं करना चाहते हैं , बस बिना काम का पैसा चाहिए हमको नौकरी सिर्फ हमको सरकारी ही चाहिए, चाहे वो हमको कैसे भी मिले, सरकारी हस्पताल में अपना इलाज नहीं करना चाहते, सरकारी बस में नहीं बैठना चाहते, तो क्या होगा इस देश का जरा सोचो. आपका भी सोचना सही है सुविधा नहीं है हैं, पर आवाज़ कोई नहीं उठना चाहता है।
सरकार क्या करे जब कोई सरकारी हॉस्पिटल में इलाज करने नहीं आता, बस में बैठने को कोई तैयार नहीं होता, सरकारी सिम नहीं लेना चाहता फिर क्या करे , पर सवाल ये उठता है की क्या हम इसके लिए जिम्मेदार है, हां कुछ हद तक, फिर यदि सर्कार कुछ करना भी चाहे तो उसमे भी भ्रस्टाचार आगे आ जाता है, जो भी उपकरण या मशीनरी या बिल्डिंग बनाने का काम को जहा से योजना बनती है और उसको धरातल पर लेन के लिए कितना घूस देना पटडा हैं सब को पता है, सब को अपना अपना हिस्सा चाहिए चाहे उपकरण काम करे या न करे, भले ही बिल्डिंग दो दिन में गिर जाने दो कुछ नहीं होता, जिम्मेदार लोग आँख कान बंद करे हुए हैं पर किसी को कुछ लेना देना नहीं हैं।
यदि हमको अपने देश से बेरोजगारी को काम करना हैं हटाना हैं तो हमको बिलकुल ब्रस्ताचार फ्री होकर काम करना होगा, हमें अपने अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी अपने देश को आगे ले जा सकते हैं. बिना इसके बेरोजगारी का अंत नहीं हो सकता है. आइये हम सब मिलकर आवाज़ उठयें और उनको जगाएं जो इसके लिए बने हैं.
जय हिन्द , जय भारत
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