Monday, June 24, 2019

हमारा समाज क्या कर रहा है

 हमारे अपने समाज के प्रति कर्तव्य 


प्राय: देखने को मिलता है कि हम अपने कर्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं तथा जो काम हमारे स्वयं की करने के हैं, उनको हम एक दूसरे के माथे मरने से बाज नहीं आ रहे हैं लेकिन इससे ना तो हम अपने आप की उन्नति कर सकते हैं और ना ही हम अपने समाज की उन्नति कर सकते हैं।  इसके लिए हमको प्रयत्न यह करना होगा कि जो कार्य हमें ही करना है स्वयं इसके लिए हमें जिम्मेदार हैं वह हम अपने पूर्ण विश्वास के साथ करें तथा दूसरों को अपने अपने कर्तव्य तथा स्वयं के कार्यों को स्वयं के द्वारा संपन्न किए जाने हेतु प्रेरित करेंl

सरकार नहीं करती मदद ऐसे बहुत सारे कार हैं जो बिना सरकार की मदद की भी पूर्ण हो सकते हैं लेकिन हम हैं कि उनको सरकार के भरोसे ही छोड़ रखे हैं जैसे कि अपने गली मोहल्लों की साफ सफाई इधर उधर कचरा ना पाएंगे साथ ही बेफिजूल का पानी बर्बाद ना करें ना तो उससे सड़क को साफ करें ना ही पशुओं को महिलाएं अथवा वाहनों को खुली सड़क पर पानी से धोएं ऐसा करने से हम अपने संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ जाती है लिहाजा हमें पानी बचाना होगा कई क्षेत्रों में यह देखने को मिलता है कि गली मोहल्लों में लोग अपने घर के सामने की सड़क तथा पशुओं को नहीं लाते हुए मिलते हैं जबकि हम सबको यह भली-भांति ज्ञात है की पानी की एक-एक बूंद बहुत कीमती है भविष्य में यह जो पानी अभी मुक्त उपलब्ध हो रहा है वह किसी दिन बोतलों में बिका करेगा इन दिनों से पानी नहीं आएगा यह एक भयानक सकते हैं और पानी की मारामारी इतनी बढ़ जाएगी कि आए दिन लड़ाई झगड़े तथा दूसरे देशों के साथ युद्ध के हालात निर्मित हो जाएंगे इसलिए हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर रोक लगानी होगी

 समाज में वैमनस्यता ना रखें 

प्रायः देखने में आता है कि गली मोहल्लों कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के बीच में अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा हो जाता है तथा नौबत यहां तक आ जाती है कि मारपीट गाली गलौज जैसी घटनाएं हो जाती हैं तथा पुलिस थानों में रिपोर्ट हो जाती है जिससे कि क्षेत्र का माहौल खराब होता है तथा बच्चे भी बड़ों का अनुसरण करते हैं जिससे कि उनकी भविष्य तथा सोचने की क्षमता पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है हमें चाहिए कि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान ना देकर लड़ाई झगड़ा ना करें तथा आपस में प्रेम मोहब्बत से ही रहें l

बिजली पानी तथा टैक्स की चोरी

यदि हम अपने आप मैं एक जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेदारी उठाते हैं तो भविष्य में हम किसी भी प्रकार से परेशान नहीं होंगे यह इस प्रकार की गारंटी है हम चाहते हैं कि हम बिजली का भरपूर उपयोग करें तथा उसका हमें कोई दिल ना देना पड़े, एसी चलाएं, पंखे चलाएं, कूलर चलाएं, फ्रीज  चलाएं और भी कई प्रकार की बिजली से चलने वाली मशीनों को चलाएं उनसे हम काम निकाले तथा उसका हमें कोई पैसा ना देना पड़े, ऐसा हम लगभग 90% लोग सोचते हैं, और करते भी यह है कि हम किसी ना किसी रूप में बिजली चोरी करते हैं जिससे होता यह है कि बिजली की खपत अधिक होती है जिसके साथ साथ लागत भी बहुत बढ़ जाती है तथा शासन को नुकसान होता है जिसके कारण शासन हम पर बिजली की दरों को बढ़ाकर हमसे ही बस ूलता है। 

Tax Chori

हम यह चाहते हैं कि हम जो कर रहे हैं वह सरकार से छुपा रहे तथा कई प्रकार की वस्तुएं हम खरीदते रहे अथवा जमीन मकान या फैक्ट्री कुछ भी हो हम सरकार को टैक्स नहीं देना चाहते हैं, लेकिन सुविधाएं हम सरकार से सब कुछ चाहते हैं।  ऐसा हो नहीं सकता है कि हम बिना पैसे के सभी सुविधाएं पालें अक्सर यह देखने को मिलता है कि व्यापारी वर्ग आम आदमी धनाढ्य वर्ग चाहता है, कि उसको टैक्स न देना पड़े और अच्छे स्कूल, अच्छे अस्पताल, अच्छी सड़कें और अच्छी कालोनियां चाहिए पर टैक्स न देना पड़े जिससे होता है कि सरकार पर जो जमा पैसा रहता है वह यूं ही ऐसे कामों में खर्च हो जाता है और टैक्स का पैसा मिलता नहीं है जिससे कि वह आम आदमी के लिए विकास के कार्य नहीं करा पाती है।  हमें अपनी इस आदतों पर विराम लगाना पड़ेगा जिससे कि हम अपने भविष्य को सुंदर बना सके हमें टैक्स जमा करना चाहिए पूरी ईमानदारी के साथ अपने देश के आगे बढ़ने मैं अपना पूर्ण योगदान देना अति आवश्यक है l

पानी की चोरी

ऐसा नहीं है कि चोरी करने के लिए सिर्फ रुपया पैसा अथवा कहने या और भी अमूल्य चीजें हैं जिनको चुराया अथवा लूटा जा सके आज के युग में पानी भी एक ऐसा अनमोल रत्न है जिसको लूटा अथवा चुराया जा रहा है। और हम समझते हैं कि हमने बहुत बड़ा काम कर लिया है हमने पानी चुरा लिया है और शासन अथवा फलां व्यक्ति को इसका पता नहीं चला।  ऐसा नहीं है कि आपने जो किया है वह किसी से छिपा है परंतु आप कर क्या रहे हैं अपने मानवीय मूल्यों को ताक पर रखकर ऐसा कृत्य कर रहे हैं, जिसका माफीनामा प्रकृति के पास भी मौजूद नहीं है।  आदमी पानी की बूंद के लिए तरस रहा है और कुछ लोग हैं जो पानी को चोरी कर उससे मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।  पानी को बेच रहे हैं पानी जो कि प्रकृति के द्वारा दिया जाने वाला एक अमूल्य उपहार है जो मानव को मुफ्त में मिलता है उसको बेचा जा रहा है और शासन तथा प्रकृति को एक प्रकार से चुना लगा  रहे हैं।  हमें ऐसी कार पुजारियों का हरकतों से बचना होगा बता पानी चोरी पर अंकुश लगाना होगा नहीं तो 1 दिन ऐसा आएगा कि हम पानी की एक बूंद के लिए भी तरस जायेंगे। 

 लोगों को शिक्षित बनाना


वह दिन बीत चुके हैं जहां पर लोग कहते थे कि शिक्षा सभी का अधिकार है आज के युग में शिक्षा एक व्यवसाय बन गया है।  जगह-जगह पर कोचिंग स्कूल कॉलेज खुल गए हैं जो कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों तथा छात्रों को लूट रहे हैं।  शिक्षा नाम की चिड़िया किस किसी के द्वारा देखी गई है यह कोई नहीं बता सकता है ,परंतु हां इस बात की गारंटी है कि आप किसी भी स्कूल कॉलेज कोचिंग में चले जाइए वहां पर आपको इस विषय से संबंधित कुछ विषय से संबंधित कुछ भी ज्ञान अथवा जानकारी प्राप्त करना हो तो उसके लिए आपको एक मोटी फीस चुकानी पड़ेगी और मोटी फीस चुकाना हर आदमी के बस में नहीं है। आज के इस महंगाई के जमाने में लेकिन होता यह है कि हम इसके लिए स्वयं ही जिम्मेदार हैं हम ज्यादातर दिखावे के लिए महंगे स्कूल कॉलेजों मैं अपने बच्चों को भेज रहे हैं और शिक्षा के नाम पर उनको वहां पर कुछ नहीं मिल रहा है और इसका नतीजा यह है कि बेरोजगारी अपने चरम पर है ना तो इसके लिए सरकार कोई नीतियां बनाती है और ना ही इसके लिए कोई ठोस कदम उठाती है सरकार के दावे खोखले हो रहे हैं तथा आम जनता मर रही है और सरकार के नुमाइंदे कोई कारवाही नहीं करते हैं जिससे होता ये है की शिक्षा माफिया बेख़ौफ़ होके अपना काम  कर रहा है।  सरकार को चाहिए की वो ऐसा करने वालो के खिलाफ कारवाही करे।

भ्र्ष्टाचार

भ्र्ष्टाचार की जड़े हमारे समाज में किस कदर फ़ैल चुकी हैं इस  बात  का अन्दाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है।  ऐसा नहीं है की बिभिन्न विभागों में बैठे अधिकारी और कर्मचारी ही भृष्ट हैं।  अगर सही माईने में देखा जाये तो भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा देने वाली सरकार ही है।  जहां आम आदमी का पाला सर्कार से नहीं पड़ता है।  वही दूसरी और हर काम के लिए सरकार के अपने नीचे ऐसे लोग बिठा रखे हैं जो किसी भी काम को करवाने   के लिए एक निच्छित रकम लेकर किसी भी काम को करवा देते हैं, चाहे वो किसी पुल, डेम , सड़क, बिल्डिंग इत्यादि के ठेके लेना हो सब काम में पैसा चलता हैं ऊपर से नीचे तक हर कोई भ्र्ष्टाचार में डूबा हैं।  जिसका नतीजा आम जनता को कभी कभी अपनी जान देकर चुकाना  पड़ता हैं।  भ्र्ष्टाचार ऐसे ही नहीं फैला हैं हर तरफ इसको फ़ैलाने में हमारे समाज की बहुत बड़ी भूमिका रही है या यूँ कह सकते हैं की समाज के कुछ लालची ठेकेदार टाइप के लोग इस गंदगी को फ़ैलाने में सफल रहे।  ऐसा नहीं है की भ्र्ष्टाचार अभी 20 - 50 साल पहले आया हो ये हो बहुत  पुराना है हमारे समाज में। राजा महाराजा  के ज़माने से है।  परन्तु इतना नहीं फैला था कैंसर की तरह  हमारे समाज को खाये जा रहा है और आज भी समाज के कुछ ठेकेदार टीवी पर बैठ कर भूँकते रहते हैं करता कोई कुछ नहीं है क्यूंकि अगर मैंने ऐसा नही किया तो मेरा काम नहीं होगा , मुझे यहाँ से हटाकर वह भेज दिया जायेगा , मेरे बच्चे अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ पाएंगे , अच्छा घर नहीं बन पायेगा समाज में मेरी इज़्ज़त नहीं होगी और बहुत सी बातें। हम अपने अंतर्मन की आवाज़ को अनसुना कर रहे है , लालच ने हमको इस कदर अँधा बहरा कर दिया है की हम एक मुर्दे की तरह हो गए है।  हम स्वार्थी होकर अपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।  हम समाज को क्या दे रहे हैं।  कोई नियम पर नहीं चलना चाहता है , हर कोई एक दूसरे से आगे निकलना चाहता है।  आये दिन न्यूज़ ने देखने सुनने को मिल जाता है की फलां पल गिरा, डेम टुटा , सड़क बही , बिल्डिंग गिरी ये सब भ्र्ष्टाचार  नतीजा है।

हम आज उस समाज का हिस्सा है जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की होगी, हम अपने भविष्य को क्या देना चाहते हैं।  समाज सुधारक हैं पर स्वामी दयानन्द , विवेकानन्द, राजा राममोहन राय जैसे नहीं हैं।  आजकल के तो एक दलाल की तरह बैठकर भूँकते हैं समाज के लिए करते कुछ नहीं है, बस फोटो खींचा ली, बहुत हो गया जैसे की समाज पर इन्होने बहुत बड़ा एहसान कर दिया हो , बेशरम लोग। हम भी कुछ काम नहीं हैं उनकी हाँ में हाँ मिलाकर चलते हैं नहीं देखते की क्या अच्छा है क्या बुरा है। ऐसे समाज को नरक कहा जाये हो कुछ बुरा नहीं होगा। हमें जरुरत है एक ऐसे समाज की जो परिपूर्ण हो।

ऐसा समाज का निर्माण होना संभव है जब हम स्वार्थी जीवन से बहार आकर लोगो को जागृत करेंगे तब ऐसा संभव है। त्याग करना होगा, एक कीमत चुकानी पड़ेगी, तब जाके ऐसे सभ्य और परिपूर्ण समाज का निर्माण हो सकेगा और तब हम गर्व से कह सकेंगे की मेरा भारत महान।


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