Wednesday, April 24, 2019
Mera Gwalior Part- II
स्वागत है आपका मेरा ग्वालियर भाग २ में जहाँ पर हम आपको रूबरू कराएँगे ग्वालियर की मूलभूत समस्याओं के बारे में।
कभी ग्वालियर शहर शिक्षाके बहुत बड़े केंद्र के नाम से पहचाना जाता था परन्तु आज वही ग्वालियर शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहा है , इसका मुख्य कारन है सरकार की गलत नीतियां तथा जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा स्कूली स्तर पर कोई ध्यान नहीं देना होना है। आम जनता को भी इनसे कोई लेना देना नहीं है। जिले में शिक्षकों की कमी, जो हैं वो भी बच्चों को पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते हैं। हालात इतने ख़राब हैं की ग्रामीण क्षेत्रों में कोई पढ़ाने को जाने को तैयार नहीं होता है , इसका मुख्य कारन है क्षिक्षा बिभाग में भी बड़े स्तर पर भ्रस्टाचार। जब तक ये ख़तम नहीं होगा तब तक शिक्षा में सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
सरकारी नीतियां इतनी बेकार हैं की बच्चों ने पढ़ने में कोई रूचि नहीं दिखाई हैं। ५ वी कक्षा तक किसी को फ़ैल को फ़ैल न किया जाये , तो बच्चे क्यू पढ़ेंगे वैसे ही पास होते हैं तो पढ़ने की क्या जरुरत है , ऊपर से वजीफा भी सरकार दे रही है। खाना भी आंगनबाड़ी में मिलता है , कोई अधिकारी कभी कभा स्कूलों का निरीक्षण करने जाता है जो एक खाना पूर्ति है।
पहले की शिक्षा पद्धत्ति बहुत अच्छी थी जिसमे किसी प्रकार का लालच नहीं था, छात्र और टीचर दोनों ही बहुत मेहनत करते थे और जो पढ़ते थे वो जीवनपर्यन्त याद रहता था और आज की पढाई है मात्रा पास होने के लिए पढ़ाया जाता है।
बच्चों को अब तो होमवर्क करने अथवा कोई गलत काम करने पर क्लास में कोई दंड नहीं दे सकते हैं। सख्त पावंदी है। क़ानून बनाया गया है की बच्चों को कोई दंड नहीं दिया जाये जिससे होता है की टीचर भी सोचता है की मुझे क्या पढ़े तो पढ़े नहीं तो नहीं। सरकारी स्कूलों में बच्चे क्लास में खेलते रहते हैं और टीचर आराम से सोते रहतें हैं। कोई देखने और सुनने वाला नहीं हैं, भगवन भरोसे चल रहे हैं सरकारी स्कूल। सिलेबस भी बहुत बदल गया है कुछ ऐसी विषय वस्तु नहीं है आजकल जो बच्चों के मानसिक विकास में सहयोग कर सकें।
बच्चों को बांटने आयी साइकिल ,ट्राई साइकिल, कॉपी, किताब आपसी खींचतान के कारन स्टोर रूम में बंद पड़ी रहतीं हैं। बहुत सी स्टेशनरी वैसे ही देख रेख के आभाव में रद्दी हो रही है जिम्मेदार अधिकारियों ने आँख बंद कर राखी हैं। स्कूल की बिल्डिंग की देख रेख सही तरीके से न होने के कारन जर्जर हालत में जा चुकी हैं। टेबिल कुर्सी भी कबाड़ होने को हैं।
टीचरों की भर्ती में घोटाला भी किसी से छुपा नहीं हैं , जिन टीचरों को कुछ आता नहीं हैं वो बच्चों को क्या पढ़येंगे ऐसा हो रहा है यहाँ पर। पता नहीं ये लोग कैसे भर्ती हो जाते हैं टीचर की पोस्ट के लिए। रूपये पैसे लेकर पास करना करना बहुत आसान हो गया है। बिना टेस्ट के कैसे भर्ती हो रही है भगवन जाने। पर इससे एक बात तो तय है की भारत के भाग्य कैसे हाथों में हैं और यह हमको किस और ले जा रहा है। बच्चों को कुछ याद नहीं हैं टीचरों को भी कोई नॉलेज नहीं है। ज्यादातर टीचर बिना काम के हैं।
जिले में सैकड़ो प्राइवेट स्कूल हैं जहाँ पर सरे आम बिना बन्दूक के लूट खसोट जारी हैं और ये सब सरकार के आगे ही हो रही है जिसमे सरकारी और गैर सरकारी लोग शामिल हैं। आम आदमी को अपने बच्चों को पढ़ना कोई आसान काम नहीं रह गया है आज कल। गरीबों को पढ़ने के लिए बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है जो उन बस की बात नहीं है, एक मोटी रकम खर्च करनी पड़ती हैं आजकल अच्छी शिक्षा पाने के लिए। गरीब आदमी जाये तो कहाँ जाये सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती और प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की हैसियत नहीं है घर चलाये या बच्चों को पढ़ाये क्या करे ?
कभी एडमिशन के नाम पर, टूशन , एग्जाम , टूर, स्पोर्ट्स , के नाम पर प्राइवेट स्कूलों के द्वारा मोटी फीस जनता से वसूला जाता है और आदमी कही शिकायत भी नहीं कर सकता है। पढाई भी कुछ ज्यादा अच्छी खासी नहीं है। बस स्कूल ड्रेस जूते हेयर स्टाइल सही दिखना चाहिए बस यही काफी हैं शिक्षा का क्या होना है वो आप बाहर से टूशन लगा के पढ़ सकतें हैं। ये है हाल और आइना हमारी ग्वालियर की शिक्षा का। रिजल्ट सब अच्छा चाहते हैं पर पढ़ना कोई नहीं चाहता है। सरकार द्वारा आरटीई शिक्षा दिलाने का कानून भी अब दम तोड़ने लगा है। प्राइवेट स्कूलों के द्वारा उसका तोड़ निकल लिया गया हैं।
रिजल्ट आपके सामने हैं जो जिम्मेदार हैं वो अपनी आँखे मूंदे बैठे हैं क्यू की उनके बच्चे तो अच्छे नामी गिरामी स्कूल में पढ़ रहे हैं। यदि हमको ये बेकार की शिक्षा पद्धति बदलने की जरुरत है हर वो चीज बदलने की जरुरत है जो हमारी शिक्षा को पीछे ले जाने का काम करती है , सवाल पूछने होंगे जिम्मेदार लोगो से। चुप रहने से हमारी शिक्षा नीचे गर्त में जाती रहेगी जो हमको रोकना होगा।
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